Homeप्रदेशनिजीकरण के उद्देश्य से लागू वर्टिकल व्यवस्था विफल

निजीकरण के उद्देश्य से लागू वर्टिकल व्यवस्था विफल


👉प्रबंधन की पॉलिसी पैरालिसिस से गर्मियों में बिजली व्यवस्था पर संकट की आशंका

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा निजीकरण के उद्देश्य से कुछ शहरों में लागू की गई विद्युत वितरण की वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है। समिति ने इस व्यवस्था को “पॉलिसी पैरालिसिस” का उदाहरण बताते हुए प्रबंधन से इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पहले से सुचारु रूप से संचालित हो रही विद्युत वितरण व्यवस्था को निजीकरण की दिशा में मोड़ने के लिए वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत बड़े पैमाने पर नियमित पद समाप्त किए गए तथा अनेक संविदा कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया गया, जिससे व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

नई व्यवस्था में 11 केवी और 33 केवी लाइनों एवं सबस्टेशनों के मेंटेनेंस कार्य को अलग कर दिया गया है, जबकि राजस्व वसूली, कमर्शियल और मीटरिंग कार्यों को अलग-अलग कर दिया गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि जहां पहले एक सहायक अभियंता 3–4 सबस्टेशन संभालता था, वहीं अब उसे 8–10 सबस्टेशन देखने पड़ रहे हैं। इसी प्रकार जूनियर इंजीनियरों पर भी कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि तकनीकी और कमर्शियल कार्यों के विभाजन से राजस्व वसूली भी प्रभावित हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई स्थानों पर 11 केवी और 33 केवी मेंटेनेंस कार्य देख रहे अभियंताओं को भी राजस्व वसूली के कार्य में लगाया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यह निर्णय अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि गर्मियों में बिजली की मांग में भारी वृद्धि होती है। इस दौरान 33 केवी सबस्टेशनों, ट्रांसफार्मरों और लाइनों का व्यापक मेंटेनेंस आवश्यक होता है। यदि तकनीकी कर्मचारियों को राजस्व कार्यों में लगाया जाएगा, तो मेंटेनेंस प्रभावित होगा और बिजली आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो सकती है, जिससे पूरी व्यवस्था के पटरी से उतरने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाए जाने से पहले ही व्यवस्था प्रभावित हो चुकी है। जब पूर्व में एक ही सहायक अभियंता राजस्व एवं मेंटेनेंस दोनों कार्य प्रभावी रूप से संभाल रहा था, तब इस व्यवस्था में परिवर्तन की आवश्यकता ही नहीं थी। वर्तमान में तकनीकी कर्मचारियों को राजस्व कार्यों में लगाना प्रबंधन की असफल और दिशाहीन नीति को दर्शाता है।

संघर्ष समिति के आह्वान पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 497 दिन पूरे होने पर आज प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

RELATED ARTICLES
Jharkhand
scattered clouds
32 ° C
32 °
32 °
17 %
6.6kmh
38 %
Thu
30 °
Fri
35 °
Sat
37 °
Sun
40 °
Mon
40 °

Most Popular