महफूज़ अहमद
👉सरकार पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं करा रही?
👉कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासन बैठाने की तैयारी क्यों?
लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह की पंचायतों का समय 26 मई 2026 को खत्म होने को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न कराकर मौजूदा प्रधानों को प्रशासन बनाए जाने की चर्चा हो रही है,यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं करा रही और कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में प्रशासन बैठाने की तैयारी क्यों की जा रही है। भाजपा सरकार पंचायतों में जनता द्वारा चुनी गई व्यवस्था को कमजोर कर सरकारी नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।
यदि किसी मौजूदा प्रधान को प्रशासक बनाया जाता है, तो वह जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं रहेगा, बल्कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति माना जाएगा। उसकी जवाबदेही गांव की जनता के बजाय सरकार और प्रशासन के प्रति होगी।
पंचायती राज व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है। गांव की सरकार गांव की जनता तय करती है, न कि सत्ता में बैठी सरकार। लेकिन भाजपा सरकार पंचायत चुनाव कराने से बचती दिखाई दे रही है, सरकार जनता के बीच जाने और जनमत का सामना करने से डर रही है। पंचायतों को लोकतांत्रिक संस्था के बजाय राजनीतिक नियंत्रण का माध्यम बनाया जा रहा है और गांवों की जनता के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
पंचायत चुनाव तत्काल घोषित किए जाएं और पंचायतों पर प्रशासन व्यवस्था के माध्यम से सरकारी नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश बंद की जाए। लोकतंत्र चुनाव से चलता है, नियुक्तियों से नहीं।
गांवों की लोकतांत्रिक ताकत और अधिकार जनता के हाथ में ही बने रहने चाहिए।
लोकदल पंचायतों में लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता की भागीदारी को मजबूत करने के लिए संघर्ष जारी रखेगा।



