संपादक महफूज़ अहमद
लखनऊ। मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में आज मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल के एक शिष्टमंडल (डेलिगेशन) ने जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों, भविष्य तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अनुरोध किया कि विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद का समाधान संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया जाए।
ज्ञापन के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—
- रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा किसी भी निर्णय से पूर्व विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों एवं भविष्य की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में भवन संबंधी अनियमितताओं के समाधान हेतु उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों—जैसे नियमितीकरण (Regularisation), संशोधित मानचित्र, आर्थिक शमन अथवा अन्य कानूनी उपायों—को प्राथमिकता देते हुए मामले का समाधान किया जाए।
- किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में संविधान के अनुच्छेद 30(1), प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत, सार्वजनिक हित तथा अनुपातिकता (Principle of Proportionality) का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
- उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की गरिमा एवं हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा के लिए राज्य सरकार आवश्यक हस्तक्षेप करे।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि शिक्षा संस्थानों से जुड़े मामलों में ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जिससे आप कानून का पालन भी हो और विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी न पड़े।
प्रतिनिधि मंडल में मुख्य रूप से ओबेदुल्ला नासिर अख्तर मालिक, हुस्न आरा, मसूद अहमद,रेहान गनी, हम्माम वहीद, अनीस अख्तर मोदी, नदीमुद्दीन,इरफ़ान उल्लाह, काशिफ सिद्दीकी, मोज़ज़म खान,अहमद रज़ा मोहम्मद ओवैस,शहाबुद्दीन सिद्दीकी,मोहम्मद नौमान, रफीक अहमद, शमशेर अली,सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



