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दलित बेटी ललिता गौतम के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे पवन भाई गुप्ता को पुलिस ने रोका

संपादक महफूज़ अहमद


👉तानाशाही के खिलाफ डीएम को सौंपा ज्ञापन

लखनऊ। मेरठ जनपद के रोहटा थाना क्षेत्र के थिरोट गांव की दलित छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से तानाशाही पर उतारू हो चुके हैं।

आज मंगलवार को जब रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता पीड़ित परिवार से मिलने और उनका दुख बांटने थिरोट गांव की ओर बढ़े, तो प्रशासन ने अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी।

​पवन भाई गुप्ता जी के काफिले को पीड़ित परिवार तक पहुंचने से रोकने के लिए थिरोट गांव को जाने वाले सभी विभिन्न रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। आरपीआई (ए) के कार्यकर्ताओं और प्रदेश अध्यक्ष ने गांव में प्रवेश करने के लिए अलग-अलग रास्तों से प्रयास किया, लेकिन हर जगह पुलिस ने अपनी ताकत का दुरुपयोग करते हुए तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया और उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया गया।

​प्रशासन के इस दमनकारी रवैये पर गहरी नाराजगी और तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने कहा यह किस तरह का लोकतंत्र है? जो परिवार अपनी जवान बेटी को खो चुका है, उसके आंसू पोंछने और सांत्वना देने पर भी सरकार ने पाबंदी लगा रखी है। पुलिस बल का यह खुला दुरुपयोग सिर्फ और सिर्फ सच को दबाने और अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए किया जा रहा है। क्या उत्तर प्रदेश में अब पीड़ितों के साथ खड़े होना भी अपराध बन गया है?”

​प्रशासन द्वारा थिरोट गांव जाने से रोके जाने के बाद, प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता जी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) से मुलाकात की और अपनी मांगों को लेकर एक कड़ा ज्ञापन सौंपा।

​ज्ञापन के माध्यम से आरपीआई (ए.) की मुख्य मांगें:
हत्याकांड के घटनास्थल, कलेक्ट्रेट परिसर के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और सभी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाए।

​ हत्या में नामजद शेष बचे सभी आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और मामले पर लीपापोती बंद की जाए।

​शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज करने और पीड़ित परिवार की आवाज दबाने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर विधिक व विभागीय कार्रवाई हो।

​ न्याय की गुहार लगा रहे जिन 7 निर्दोष प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा गया है उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और अन्य नामजद व अज्ञात लोगों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।

​ पीड़ित परिवार को चौबीसों घंटे कड़ी सुरक्षा प्रदान की जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।

​पवन भाई गुप्ता जी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आ.) इस तानाशाही के आगे झुकने वाली नहीं है। पुलिस चाहे जितने भी रास्ते रोक ले, लेकिन दलित बेटी ललिता गौतम को न्याय दिलाने और पीड़ित परिवार को उनका अधिकार दिलाने के लिए हमारी लड़ाई कलेक्ट्रेट से लेकर सड़क और शासन तक जारी रहेगी।

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