क्यों परिवहन निगम के कर्मचारी इतना पीड़ित है? :जसवंत
लखनऊ। यू पी रोडवेज इम्प्लाइज यूनियन के प्रदेश संयोजक जसवंत सिंह नें कहा कि प्रबंध निदेशक
पिछले माह परिवहन निगम मुख्यालय में स्थित भगवान शिव के मंदिर पर पूजा कर उपवास रखते हुए परिवहन निगम की एवम् कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति क्यों इतनी खराब है, कितनी उदासीनता है क्यों निगम मुख्यालय सुदृढ़ योजना बनाता है कि स्थिति सुधरे,क्यों परिवहन निगम के कर्मचारी इतना पीड़ित है ,क्यों बिना जुर्म के सजा पा रहा है, क्यों गंभीर अपराध, अनियमितता करने पर भी उन अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं होती, क्यों मुख्यालय के आदेशों निर्देशों को रोज अपनी मर्जी से डिपो, क्षेत्रों के अधिकारी तोड़ते ,मरोड़ते है और निगम मुख्यालय शांत रहता है ,क्या शासन ,निगम मुख्यालय के आदेशों का कोई महत्व नहीं रह गया है और मुख्यमंत्री परिवहन निगम को हजारों करोड़ दे कर हजारों नई वाहने दे कर भी आज आय १३,१४ करोड़ क्यों माननीय इसमें दोष केवल निगम प्रबंधन का ही नहीं है जिम्मेदार हैं शासन के बड़े अधिकारी जो अपने आदेशों का पालन प्रदेश में नहीं करा पा रहे, जिम्मेदार है पुलिस प्रशाशन जो अवैध संचालन को ,राजस्व की लूट करने वालो को पकड़ती नहीं ,परिवहन विभाग है जिम्मेदार जो चाहे तो एक भी डग्गामार संचालन नहीं चल सकता को रोकती नहीं जिससे मुख्यमंत्री आपकी विश्वसनीय सरकार की छवि धूमिल होती है , राजस्व की लूट होती है और परिवहन निगम तो आज मिट्टी में मिल ही गया है कितने दिन आपकी सरकार की मदद से चलेगा।
प्रबंध निदेशक पिछले माह मैने और हमारे संघठन के प्रदेश अध्यक्ष राम जी त्रिपाठी ने आमरण अनशन को अपर प्रबंध निदेशक महोदय के निवेदन पर स्थगित कर दिया था किंतु क्या अभी तक उन सुझाओ पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई।
आज जो रवैया डिपो क्षेत्रों के अधिकारी कर रहे है वह इसलिए कि निगम मुख्यालय स्तर पर कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई,अवध डिपो एआरएम तानाशाही कर रहे हैं वह उन छोटे कर्मचारियों पर दबाव बना कर मनमानी करते हुए सीएल अवकाश में भी मनमानी कर रहे है।
अवध डिपो में कई कई गाड़ियां ऑफ रूट है चालकों को वाहन उपलब्ध नहीं है,चालकों की कमी से पूरा परिवहन निगम अपना शेड्यूल किलोमीटर नहीं कर पा रहा है जो चालक अच्छे है उनको उत्पीड़ित किया जा रहा है,अतिरिक्त किलोमीटर करने वाले चालकों को परेशान किया जा रहा है।
तत्कालीन प्रबंध निदेशक आशीष गोयल ने किलोमीटर बड़े के लिए ऐसा किया था इस पावन कार्य को मिटाने की कार्यवाही हो रही है जिसे अब उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यदि ऐसा ही रहता है तो संघठन यह करने के लिए विवश होगा ही संविदा के चालक परिचालक केवल २२,२४ दिन ही ड्यूटी करे। जब तक डग्गामार संचालन बंद नहीं होता तब तक वेतन ,प्रोत्साहन में कटौती बर्दाश्त नहीं करेगा। कृपया तत्काल इस पर कार्यवाही करना चाहेंगे।



