👉बल्कि तालीमी इदारे मुल्क के मुस्तक़बिल की तामीर की बुनियाद होते हैं
लखनऊ। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट तलहा रशीदी नें कहा कि अगर किसी इदारे से मुताल्लिक कोई क़ानूनी या इंतिज़ामी मसला है, तो उसका हल क़ानून और इंसाफ़ के दायरे में निकाला जाना चाहिए। लेकिन सियासी नफ़ा-नुक़सान की ख़ातिर किसी तालीमी इदारे को निशाना बनाना और हज़ारों तलबा के मुस्तक़बिल, उनके ख्वाब, मुल्क के भविष्य को दांव पर लगाना किसी भी तरह मुनासिब नहीं। आज पूरी दुनिया बड़े बड़े तालीमी इदारे तामीर करने का मुक़ाबला कर रही है और हमारी हुकूमतें बुलडोज़र लेकर यूनिविर्सिटी, कॉलेज और मदरसे गिराने में मस्त हैं।
इख़्तिलाफ़ अपनी जगह, मगर तालीम को सियासत की नज़र नहीं किया जाना चाहिए। तालीमी इदारों की हिफ़ाज़त करना हम सबकी मुश्तरका ज़िम्मेदारी है।



