लम्पी स्किन डिजीज की कोई भी सूचना प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही की जाए
किसी भी गोआश्रय स्थल पर जलभराव की स्थिति न होने पाये
दुग्ध मूल्य का नियमित भुगतान किया जाए
-श्री धर्मपाल सिंह
लखनऊ: पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि विभागीय योजनाओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि माह नवंबर, 2026 तक विभागीय बजट का कम से कम 75 प्रतिशत व्यय हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बजट व्यय न होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जायेगी।
पशुधन मंत्री ने संचारी रोग नियंत्रण/एफएमडी/निराश्रित गोवंश के वर्षा से बचाव तथा उनके लिए हरे चारे की व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया कि लम्पी स्किन डिजीज की कोई भी सूचना प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही की जाए। एलएसडी (लम्पी स्किन डिसीज़) की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्व से ही पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों में सतत निगरानी रखी जाए तथा आवश्यक दवाओं, टीकाकरण एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी स्थिति में रोग का प्रसार न होने पाए।
वर्षा ऋतु को देखते हुए मंत्री ने गोआश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी गोआश्रय स्थल पर जलभराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए। परिसर सूखा एवं स्वच्छ रखा जाए तथा गोवंश के बैठने के लिए पर्याप्त चबूतरों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही वर्षा से बचाव के सभी आवश्यक प्रबंध समय से पूरे किए जाएं। उन्होंने प्रत्येक जनपद में पांच एकड़ भूमि पर हरा चारा बोने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य की नियमित सूचना निदेशालय को उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रगति की सतत निगरानी की जा सके और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित रहे।
श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में नियमित रूप से पशु मेलों का आयोजन कराया जाए। उन्होंने कहा कि पशु मेले पशुपालकों के लिए उपयोगी मंच हैं, इसलिए इनके संचालन में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। श्री सिंह ने कहा कि शासन की प्राथमिकता के अनुरूप सभी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।उन्होंने दुग्ध समितियों की संख्या में वृद्धि करने,दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने, दुग्ध मूल्य का नियमित भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए।
बैठक में राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा पासवान ने कहा कि गो आश्रय स्थलों पर गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूह की भी सहायता ली जाए। टीकाकरण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने संबंधित अधिकारियों को मंत्री जी द्वारा दिए गए निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुचिकित्साधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, हरे चारे एवं भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, एफएमडी टीकाकरण, गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, कृत्रिम गर्भाधान तथा दुग्ध समितियों के गठन सहित सभी प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए।
बैठक में दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के0, विशेष सचिव दुग्ध विकास श्री देवेन्द्र पाण्डेय, विशेष सचिव श्री राम सहाय यादव, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ श्री वैभव श्रीवास्तव, पास पशुपालन विभाग के निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. संगीता तिवारी, पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पी.के. सिंह सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सम्पर्क सूत्र – निधि वर्मा



