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गंभीर न्यूरोसर्जरी का सफलतापूर्वक ऑपरेशन

संपादक महफूज़ अहमद


👉सिविल चिकित्सालय में पहली बार जटिल ऑपरेशन के लिए डॉक्टर टीम की हुई सराहना

👉निदेशक जीपी गुप्ता नें पूरी टीम को दी बधाई

अजय सिंह
लखनऊ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ में न्यूरोसर्जन की तैनाती के बाद पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी का सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ। चिकित्सालय में न्यूरोसर्जरी की यह उपलब्धि गंभीर एवं जटिल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

चिकित्सालय के निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने सफल शल्यक्रिया के लिए पूरी शल्य टीम को बधाई देते हुए कहा कि सिविल चिकित्सालय पीड़ित मानवता की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने कहा कि सरकारी चिकित्सालय में इस प्रकार की जटिल न्यूरोसर्जरी का सफल होना मरीजों को बेहतर एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

जनपद सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी विनय तिवारी (37 वर्ष) पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से कमर में गंभीर दर्द से पीड़ित थे। मरीज को टीबी की बीमारी भी थी। लगातार समस्या बने रहने पर उन्होंने सिविल चिकित्सालय में न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी से परामर्श लिया।

मरीज की जांच एवं MRI में रीढ़ की हड्डी के L3 vertebra में TB infection के कारण स्पाइनल कॉर्ड/न्यूरल संरचनाओं पर गंभीर दबाव पाया गया। इसके कारण मरीज के बाएं पैर की जांघ एवं घुटने के नीचे की मांसपेशियों की ताकत काफी कम हो रही थी। चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते उचित उपचार नहीं किया जाता तो मरीज के दोनों पैरों में स्थायी कमजोरी अथवा पैरालिसिस का गंभीर खतरा हो सकता था।

डॉ. विनोद कुमार तिवारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में शल्यक्रिया अत्यंत सावधानी एवं विशेषज्ञता के साथ करना आवश्यक होता है, क्योंकि स्पाइनल कॉर्ड एवं संबंधित न्यूरल संरचनाओं को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त क्षति होने पर होने वाली न्यूरोलॉजिकल कमजोरी स्थायी भी हो सकती है।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के नेतृत्व में शल्यक्रिया की तैयारी की गई। अनुभवी एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। शल्यक्रिया के दौरान L2-L4 spinal fixation करते हुए Titanium screws एवं rods का उपयोग किया गया।
ऑपरेशन लगभग दो घंटे चला और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

डॉ. तिवारी ने बताया कि इसी प्रकार की जटिल शल्यक्रिया निजी क्षेत्र में कराने पर लगभग 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो सामान्य परिवारों के लिए वहन करना कठिन होता है। सिविल चिकित्सालय में यह उपचार उपलब्ध होने से मरीजों को अत्यंत महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।

ऑपरेशन के बाद मरीज विनय तिवारी की स्थिति संतोषजनक है। वर्तमान में उनका उपचार सिविल चिकित्सालय के न्यूरोसर्जरी वार्ड में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज के पैरों में ताकत आनी शुरू हो गई है तथा वह दोनों पैरों को चला पा रहा है।

मरीज की पत्नी श्रीमती सोनी तिवारी ने समय पर उपचार एवं सफल शल्यक्रिया के लिए सिविल चिकित्सालय के चिकित्सकों एवं पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

सफल शल्यक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में डॉ. राजेश, डॉ. कासिम की अनुभवी टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही सिस्टर पूजा एवं सिस्टर किरण ने भी शल्यक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.सी. पांडे एवं अधीक्षक डॉ. शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि सिविल चिकित्सालय में गंभीर एवं जटिल रोगों का उपचार उपलब्ध होना मरीजों के लिए बड़ी राहत है।

निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने कहा कि रीढ़ की हड्डी की टीबी जैसी गंभीर बीमारी में समय पर जांच एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है। उपचार में देरी होने पर न्यूरोलॉजिकल कमजोरी बढ़ सकती है और दोनों पैरों में पैरालिसिस का खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने चिकित्सालय की पूरी टीम को इस चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए बधाई दी।

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