Homeप्रदेशकाकोरी ट्रेन एक्शन डे पर क्रांतिकारी का योगदान विषय पर, चर्चा

काकोरी ट्रेन एक्शन डे पर क्रांतिकारी का योगदान विषय पर, चर्चा

संपादक महफूज़ अहमद


लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा काकोरी ट्रेन एक्शन डे पर भारत की स्वतंत्रता में काकोरी के क्रांतिकारी का योगदान विषय पर परिचर्चा, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर, तकरोही, इंदिरा नगर, लखनऊ किया गया।

कार्यक्रम का आरंभ शहीदों के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पांजलि तथा सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम में संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध, संस्थान के निदेशक डॉ राकेश सिंह, डॉक्टर धीरेंद्र सिंह, अरुणेश मिश्र, सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य अवधेश, सुशील कुमार बच्चा, देवीशरण त्रिपाठी, सुभाष शर्मा, डॉ0 आर०पी० सिंह, सुरेश पाण्डेय, हिमांशु पाण्डेय, वेन डॉ० जुमलंपिटिए पुण्यासार थेरो जी, गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार बंधु तथा शिक्षक-शिक्षिकायें, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित थे ।

कार्यक्रम के आरंभ में डॉ० राकेश सिंह ने संस्थान का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि 09 अगस्त, 1925 को काकोरी के क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजी शासन को चुनौती देकर यह संदेश दिया कि राष्ट्रहित व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर है, इस घटना ने देश के युवाओं में राष्ट्र भक्ति और स्वतंत्रता को भावना को और मजबूज किया और स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाया । असहयोग आंदोलन (1920-1922) के वापस लेने के बाद, कई युवा नेता निराश हो गए थे और उन्होंने महसूस किया कि अंग्रेजों से आजादी पाने के लिए अहिंसात्मक तरीकों के अलावा क्रांतिकारी संदेश देने की आवश्यकता है ।

संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध ने बताया उत्तर प्रदेश की धरती पर काकोरी के निकट क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध साहसिक कदम उठाते हुए ट्रेन से सरकारी खजाना अपने कब्जे में लिया। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम को गति देने, हथियार जुटाने और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष को मजबूत करना था।

सुशील कुमार बच्चा ने बताया कि काकोरी की यह घटना केवल एक ट्रेन की लूट नहीं थी, बल्कि गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के संकल्प, साहस और राष्ट्रभक्ति की ऐसी गूंज थी, जिसने आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य अवधेश ने बताया कि 09 अगस्त, 1925 को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने लखनऊ से सहारनपुर जा रही ट्रेन को काकोरी के निकट रोककर उसमें ले जाए जा रहे ब्रिटिश सरकार के खजाने को अपने कब्जे में लिया और काकोरी की घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और क्रांतिकारी चेतना का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

इस परिचर्चा के अतिरिक्त कार्यक्रम में “भारत की स्वतंत्रता में काकोरी के क्रांतिकारी का योगदान”विषय पर निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गयी। चित्रकला प्रतियोगिता में युक्ति वर्मा कक्षा -9 को प्रथम, अंजली कक्षा-7 को द्वितीय तथा अनिरुद्ध कक्षा-7 को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

इसी तरह निबंध प्रतियोगिता में संस्कृति द्विवेदी कक्षा-9 को प्रथम, आस्था रावत कक्षा-10 को द्वितीय, शलोनी कक्षा-10 को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

अंत में संस्थान के डॉ० धीरेन्द्र सिंह ने बताया की काकोरी के क्रांतिकारियों ने युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रहित में लगाने का उदाहरण प्रस्तुत किया साथ ही, कार्यक्रम में आए हुए गणमान्य अतिथियों, वक्ताओं, मीडिया कर्मियों, विद्वानों, छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

RELATED ARTICLES
Jharkhand
overcast clouds
28.3 ° C
28.3 °
28.3 °
77 %
3.4kmh
93 %
Mon
31 °
Tue
32 °
Wed
33 °
Thu
33 °
Fri
31 °

Most Popular