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दिल को छू जाते हैं कजरी के बोल, भाव और संवेदनाएं.. डॉ लीना मिश्र

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लखनऊ। बालिका विद्यालय में भारत विकास परिषद द्वारा संस्कृति सप्ताह के अंतर्गत कजरी उत्सव का आयोजन किया गया। कजरी भारतीय लोक संगीत की कोख से उत्पन्न हुई है जिसे समय के साथ भारतीय उपशास्त्रीय संगीत में सम्मिलित कर लिया गया। कजरी गीत की रचना आमतौर पर प्रेम, विरह, श्रृंगार, और प्रकृति के परिवेश से संबंधित होती है।

इसमें प्यार, बिछोह, प्रतीक्षा, और प्रेमी की यादों का चित्रण किया जाता है। सावन भादों का महीना, जो वर्षा ऋतु से संबंधित है, कजरी गीतों का महीना है। कजरी का गायन मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है और इसके शब्दों में भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति होती है। इसमें रागों का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है, जैसे राग भैरवी, राग मल्हार और राग यमन। इन रागों के माध्यम से गायक या गायिका अपनी आवाज में निरंतरता और आरोह अवरोह के साथ श्रोताओं के दिलों को छूने का प्रयास करते हैं। कजरी में खास तौर पर मधुरता और तीव्र भावनात्मक संवेदनाओं पर जोर दिया जाता है।

बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ में भारत विकास परिषद, महिला शाखा चौक द्वारा संस्कृति सप्ताह के अंतर्गत कजरी गीत और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भारतीय संस्कृति एवं संस्कारयुक्त कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए भारत विकास परिषद द्वारा संस्कृति सप्ताह के अंतर्गत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

कार्यक्रम का आरम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र द्वारा भारत विकास परिषद की अध्यक्ष कंचन अग्रवाल, साधना रस्तोगी तथा दीपा शुक्ला का विद्यालय परिसर में स्वागत करके किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने कहा कि कजरी की विशेषता यह है कि यह शास्त्रीय संगीत की तकनीकी जटिलताओं से भरी नहीं होती, बल्कि यह सरल, सहज और प्रवाहयुक्त होती है, जो आम जनमानस के साथ सहजता से जुड़ती है। इसके बोल आम बोलचाल की भाषा में होते हैं, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से जुड़ सकते हैं। कजरी गीतों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन गीतों में आदिवासी और ग्रामीण जीवन के अनगिनत पहलुओं की झलक मिलती है।

इसमें बारिश के मौसम की सुंदरता, किसान की चिंता, और प्रेमी-प्रेमिका का दुख-खुशी का संचार किया जाता है। कृषि कार्य या झूला इत्यादि जैसे मनोरंजन अथवा मेहंदी लगाते समय भी इसका पूर्ण मनोयोग से गायन होता है। कजरी का प्रमुख उद्देश्य श्रोताओं को मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करना है। इसका संगीत न केवल सुनने में सुखद होता है, बल्कि यह श्रोताओं को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम भी प्रदान करता है। कजरी के संगीत में स्त्री जीवन की आंतरिक सुंदरता और संवेदनाओं का शानदार वर्णन मिलता है। इसमें गायक या गायिका भावनाओं में बहकर गीत को गाते हैं, जिससे श्रोता भी उस भावनात्मक लहर में बहने के लिए प्रेरित होते हैं।

कजरी गीतों में मौलिकता के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत की सुंदरता भी समाहित होती है। यह भारतीय संगीत की एक महत्वपूर्ण धारा है, जो न केवल भारतीय संस्कृति की समृद्धता को दर्शाती है, बल्कि इसकी सरलता और भावनात्मकता को भी प्रकाशवृत में लाती है।

इस प्रकार, कजरी उपशास्त्रीय संगीत का एक अद्वितीय रूप है जो भारतीय लोक और शास्त्रीय संगीत के बीच सेतु का काम करता है। इसकी मधुरता और भावनाओं की गहराई श्रोताओं के दिलों में एक स्थायी छाप छोड़ती है। कार्यक्रम का आयोजन रागिनी यादव एवं प्रतिभा रानी के निर्देशन में हुआ। कजरी उत्तर प्रदेश और बिहार के भोजपुरी क्षेत्र का एक लोकप्रिय लोकगीत और नृत्य है। कजरी हिंदुस्तानी उपशास्त्रीय संगीत की एक शैली भी है जिससे गिरिजा देवी, शोभा गुर्टू, छन्नू महाराज आदि संबंधित हैं।

बिस्मिल्ला खां और अलाउद्दीन खां बहुत सुंदर कजरी धुन बजाते थे।आज इसी परम्परा के निर्वहन की दिशा में विद्यालय में कजरी उत्सव का आयोजन हुआ जिसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर कजरी गीत और नृत्य प्रस्तुत किये। गीतों के बोल थे पिया शंकर का डमरू बाजे पार्वती का नंदन नाचे, कैसे खेले जयबू सावन में कजरिया बदरिया घिर आए ननदी, रिमझिम बरसे पनिया झूले राधा रनिया री हारी, काहे करेलू गुमान गोरी सावन मां, हरे रामा भीजत मोरी चुनरिया, पिया मेंहदी मंगा दे मोती झील से, धीरे-धीरे चलो सुकुमार सिया प्यारी जैसे अनगिनत मनोहारी गीत और नृत्य प्रस्तुत किए गए। छात्राओं ने अपने प्रस्तुतीकरण से सभी का मन मोह लिया। कजरी गीत प्रतियोगिता में कक्षा 8 की इल्मा प्रथम स्थान पर, रुखसार द्वितीय स्थान पर और कक्षा 12 की सना तृतीय स्थान पर रही ।

इसी प्रकार कजरी नृत्य प्रतियोगिता में कक्षा 6 की खुशी प्रथम, कक्षा 10 की रोशनी द्वितीय तथा कक्षा 11 की शिल्पी तृतीय स्थान पर रही। ढोलक और मंजीरे के सुंदर प्रस्तुतीकरण के लिए कक्षा 9 की काजल तिवारी तथा रोशनी को पुरस्कार मिला। इन सभी जीतने वाली छात्राओं को भारत विकास परिषद महिला शाखा चौक द्वारा पुरस्कृत किया गया। इन प्रतियोगिताओं की निर्णायक सीमा आलोक वार्ष्णेय और शालिनी श्रीवास्तव थीं।

कार्यक्रम में उमा रानी यादव, पूनम यादव, उत्तरा सिंह, ऋचा अवस्थी, माधवी सिंह, मंजुला यादव, मीनाक्षी गौतम और रितु सिंह ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 12 की छात्रा अंजलि पटेल ने किया। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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