Homeप्रदेशकवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओ से बाँधा समां

कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओ से बाँधा समां

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हरदोई गजानन सेवा समिति वंशीनगर द्वारा आयोजित गणेश महोत्सव में कवियों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बाँधा कि श्रोतागण देर रात तक अपनी कुर्सियों पर डटे रहे। कवि सम्मेलन की शुरुआत सीतापुर से पधारे गीतकार जगजीवन मिश्र की वाणी वन्दना से हुई। उन्नाव से आये हास्य कवि अनुभव अज्ञानी ने “थी दिखने में हथौड़ी मगर कील रही है, वो मेरे कैमरे की पूरी रील रही है। बीबी को ब्यूटी पार्लर का कोर्स कराया,
अब घर के सदस्यों की भौहें छील रही है” कविता पढ़ गुदगुदाया। हरदोई से कवयित्री श्रृंगार रस की कवयित्री आकांक्षा गुप्ता ने “यदि प्रतीक्षा समर्पण है शबरी सा तो
वन की कुटिया में भी राम मिल जाएंगे” कविता पढ़ वाहवाही लूटी। बाराबंकी से आये हास्य कवि विकास बौखल ने जमकर हंसाया। उन्होंने “किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए।
सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए।ये किसी शख्स को दोबारा ना मिलने पाए,प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए।” कविता पढ़ तालियां बटोरीं। गीतकार जगजीवन मिश्र ने “दिन पुराने वही आज कल आए है, बाद बरसो सुहाने ये पल आए है, अबकी बनवास लम्बा था पर कट गया ,राम अब फिर से अपने महल आए हैं” पढ़ वाहवाही लूटी। लखनऊ से आये ओजकवि योगेश चौहान की कविता “सीमा पार गिरा बूंद रक्त का हमारा यदि,सर्वनाश करने वाला गोला बन जाएगा।” पर पूरा पांडाल भारत माँ के जय घोष से गूंज उठा। हास्य कवि अजीत शुक्ल ने ” बेटा बाप चाचा ताऊ सत्ता सुख भोग रहे, राजनीति में ही खानदान देख लीजिये, अंधकार से भी दिनमान कांपने लगा है भारत की ओर भगवान देख लीजिये’ कविता सराही गई। रायबरेली से आये संचालक नीरज पाण्डेय की कविता “माँ है जीती जागती स्वयम ममता की मूर्ति,माँ से बड़ा कोई भगवान नही होता है।” काफी पसंद की गई।समिति अध्यक्ष मनीष चतुर्वेदी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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